Thursday, May 23, 2013

Dil hun dhadakta hun

दिखे  जो  हस्ता हुआ - है दिल का एक कोना
न दिखे वो जो - है रोना
लाखों पलों की निशानियाँ
कुछ ख़ास दिलों की कहानियाँ
सब बस रही इस दिल में
बस ये दिल नहीं अब बस में
रोक लूँ खुद को या बह जाने दूँ
सारी कहानियाँ कह जाने दूँ
और इस दिल को एक ज़िन्दगी जी जाने दूँ।।
दिल भर आता है,  आँखों में आंसू ठहर जाते
आँखों में ख्वाब है आसुंओं को न रख पाते
बह जाने देते
यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ
दिल हूँ  धड़कता हूँ
नई धुप में चल पड़ा हूँ
खुशियों का जश्न मानते गमों को पीछे छोड़ते
यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ
दिल हूँ  धड़कता हूँ

Tuesday, May 21, 2013

Khushiyon ki zameen

खुशियों की न ज़मीन होती  न आसमान
होने को एक पल में  हवा हो जाती
रहने को संग सदियाँ बिता देती
खुशियों की न ज़मीन होती न आसमान
बस इस दिल से निकलती
इस दिल से होती ये जवान

गहरे सागर से मोती चुन लो
या बारिश के बसरते  पानी से ओले
हर दिल अपनी ख़ुशी चुनता है
बेफिक्र के गुब्बारों से हवाओं में उड़ता है
न ज़मीन देखता न असमान
बस यूँ ही खुशियों से भरी ज़िन्दगी
जीने की चाहत करता है
और वो ये जनता है
खुशियों की न ज़मीन होती न असमान
बस इस दिल से निकलती
इस दिल से ही होती ये जवान

Friday, May 3, 2013

wo 30 din wahi

मैं हूँ यही पर अब आस्मां वो नहीं
कैलेंडर के वो ३०  दिन वही
पर ऋतू  है नई
ज़िन्दगी जो जी थी यादें बन गई
पर कैलेंडर के वो ३०  दिन वही

आजकल बस इतवार को फुर्सत रहती है
बाकी वारों में खुद को संवारते थोड़े पैसे कमाते
कैलेंडर की ओर देख के मुस्कुराते
और कहते हम है यही पर अब वो समां नहीं
कैलेंडर के वो ३० दिन वही , पर ऋतू है नई

वो दिन जब दिन गिनना आदत न थी
खुली फिजाओं सा बहना एक  राहत थी 
होती थी दिन दोपहरी शाम बेहिसाब मस्तियाँ 
ज़िन्दगी जो जी अब वो यादें बन गई
कैलेंडर के वो ३०  दिन वही,पर ऋतू है नई


Monday, April 22, 2013

ishq ko jane bina

इश्क में डूबने को मचल रहा  है दिल
पर इश्क होता है क्या ,ये सोच सोच के
शाम और  सावरे की धुप में पिघल रहा है दिल

हर मोड़ पर प्रेम पंछी  टकरा रहे
जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे
प्रेम के चेहरे  हर घड़ी  बदल रहे
एक का साथ छुटा दूजे के संग निकल पड़े
पर जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे

उम्र की रफ़्तार से घबरा कर
इसी पल में इश्क को पा कर
कह कह कर इश्क जताने वाले भी मिले
वो बेखबर सोचे इश्क की उम्र यही होती
कैसा ये इश्क होता कैसी उसकी छाव होती

और ये दिल बेचारा पिघलता रहा धुप ढलती  रही
पर फिर भी दिल की धड़कने धड़कती रही
इश्क को जाने बिना इश्क में डूबने को मचलती रही


Saturday, March 16, 2013

lamhe

रात के वो लम्हे आज भी याद है
जब चाँद को भी होश न था
बेखबर था सारा आस्मां
बेखबर थी हर धड़कन
यूँही किनारों पे बैठे  रात ढल गई
लहरों से लहरें मिल गई
हम दो दिल बेखबर थे
तारों की चादर ओढ़े
एक हुए जा रहे थे
एक दूजे में घुलते जा रहे दो दिल
आज भी याद है वो फिजाओं का यूँ छु के गुज़रना
सारे ख्यालों को संग बहा ले जाना
हम दो दिल बेखबर थे
एक अलग आस्मां बुन रहे थे
बिना कुछ कहे एक दूजे को सून रहे थे
ख्वाबों को नहीं अपनी मोहब्बत को जी रहे थे
रात के वो लम्हे आज भी याद है
साथ बीताये वो लम्हे आज भी याद है